~ साये…

 

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साये ये रात के साये,

कहाँ ले आए हमें ये रात के साये,

घनेरे कलेरे डरे डरे से ये घबराये,

ओड़ चादर फटी ये ठुकराये,

ये साये रात के

 

बिना बात कभी पीछे पड़े,

धुआँ उड़ाते, चेहरा छुपाते, लड़खड़ाते,

गिरते गिरते से, सम्भलते से, डगमगाते,

दूर से झाँकते, क़रीब आ सो जाते,

हाय ये राते के साये

 

एक सच को छिपाए हुए,

बिन बुलाये ये आये हुए,

एक मरियल लकीर से, फ़क़ीर से,

भूख से लिपटे, कालिख से चिपटे,

ये काले काले साये

 

आमने, सामने, घूमते गोल गोल,

कभी बैठे, कभी खड़े, मुँह खोल,

जैसे अभी ये जाएँगें निगल,

वो पहली किरण, इनका आख़िरी शंड़,

और रह जाती ना जाने वाली, काली रात

 

हाय, ये काली के रात के साये

~ सहेली…

~ सहेली

~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~

मोहे इश्क़ हुआ ज़रा धीरे से,

धीरे धीरे से तेरे वीरे से,

इक काम करा दे मेरा,

ले चल कल उसे तू मेले में,

मिलवा दे मुझे तू अकेले में,

तू है ना मेरी पक्की वाली सहेली, सुलझा दे मेरे दिल की पहेली,

मिलवा दे ना, मिलवा दे ना…

मेरा दिल अब ना मेरे क़ाबू में,

नैन मेरे, रस्ते पे अड़े,

थक गयी अब मैं खड़े खड़े,

इक बार मुझे मिलवा दे ना,

नाल उसदे मुझे बिठा दे ना,

ओ मेरी पक्की वाली सहेली, सुलझा दे मेरे दिल की पहेली,

मिलवा दे ना, मिलवा दे ना…

मैं रात से बुझी बुझी सी हूँ,

ना भूख मुझे ना प्यास लगे,

कभी दिल अटके कभी साँस रुके,

अंकल को ससुर बनवा दे ना,

मम्मी को सास बनवा दे ना,

ओ तू मेरी पक्की वाली सहेली, सुलझा दे मेरे दिल की पहेली,

मिलवा दे ना, मिलवा दे ना…

मैं बावरी हो के नचड़ा

मैं हुँड नहीयो है बचना,

जग झूठा लगे वो सच-ना,

तेरा वीरे विच दिखे मुझे सजना,

मैं बस उस वास्ते है सजना,

हायों मेरी पक्की वाली सहेली, सुलझा दे मेरे दिल की पहेली,

मिलवा दे ना, मिलवा दे ना…

तू मेरी पक्की वाली सहेली है,

बचपन से साथ तू खेली है,

मेरी डोली घर बुलवा दे ना,

अपड़े वीरे से अन्ख लड़वा दे,

अपने घर मेरा घर वसावा दे,

ओ मेरी सच्ची वाली सहेली, सुलझा दे मेरे दिल की पहेली,

मिलवा दे ना, मिलवा दे ना…

~ Ecliptic…

~ Ecliptic…

 

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Let’s meet in Autumn,

When the leaves are leaving home…

Or let’s meet soon after that;

When the trees are naked…

Or may be a further after;

When they play a snowman wearing a white blanket…

Or how about one more step ahead;

When they are covered with glittery green colours…

 

But why do we need a season?

 

let’s just meet without any reason…

Let’s follow the ecliptic path;

perfectly like Sun follows Earths spark…

You and me, we should just meet,

to create memories in every season, let that be the reason…

Let’s live moments and memories;

and create a lore, let’s just meet more, more and more…

~ आलोचना…

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~ आलोचना

जब करो तुम कोई वजह से किसी की भी आलोचना,

रोक लेना जिह्वा को अपनी और दिल से इतना सोचना

 

की तुम में कितनी खूबियां है तुम में कितने दोष हैं,

लेना पकड़ कोना कोई और आँखों को अपनी मूँद कर,

अपनी सिमटी समझ की खिड़कियों को देना खोल तुम,

और सोचना, उठा भी पाओगे क्या अपनी कमीयों का तोल तुम

 

कितना आसान चीनीनुक्ता और अपनी कथनी को कहना पुख्ता,

है बड़ा कठिन सुनना लगा कान और अपनी गलती को लेना मान,

इक धक्का सा लग जाता है जब दोष कोई गिनवाता है,

अपने दोषों की गठरी छुपाने को अफवाहें फिर फैलाता हैं

 

ये अफवाहेंसुखी, तीखी, लाल मिर्च सी होती है,

और हवा का रुख जब पलटता अपनी ही आँखें रोती हैं,

तेरा जायेगा तेरे संग और तू अपने करम की ही खायेगा,

कर के दूजों की बुरीभली तू किसी की आँख ना भायेगा

 

वो जो इधर उधर की खाता है और अफवाहें फैलाता है,

वो किसी का कैसे हो सकता हैं जो बातों की आग लगाता हैं,

ये जिव्हा, गुड़मिश्री की ढेली हैं ये तेज़तीखी तलवार भी है,

ये कड़वा ज़हर का घूँट कभी और करोड़ों का व्यापार भी हैं

 

रोक लेना जिह्वा को अपनी बस दिल से इतना सोचना,

करने लगो आलोचना, अब जो करने लगो आलोचना…

 

Picture : Google Images

~ आँच…

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सुनो आँच ज़रा धीमी कर दो, चावल देर से पकेंगे,

और हम कुछ और देर तलक साथ लिपट लेंगे

कुछ कहना नहीं, आज तुमने फिर पाज़ेब को पहना नहीं,

चावलों को धीरेधीरे पकने दो, कुछ और देर सर रखने दो

थोड़ा सा होंठों में फाँसला करो, जो जगह मिलेगी,

आज कच्चे चावल खिला देना, मेरे होठों को चबा देना

बीचबीच में आँखें मुँदना, आज चावलों का पानी पिला देना,

तुम कूदना और मुझे फाँदने की वजह देना

आज ख़्वाब सज़ा लेते है, रहने दो चावल, रात भर पका लेते है,

पकने दो उन्हें भी, जगने दो हमें भीसहर तक, दोपहर तक

 

~ जिस्म-फरोशी…

 

दुश्मनों को भी दोस्त बना देती है,

राजनीती है ये कुछ भी करा देती है,

भाई को भाई से दरकार नहीं होती,

ये आम आदमी की सरकार नहीं होती

 

यहाँ गरीब ही आना, गरीब रहना पड़ता है,

बदनसीबों का बन के नसीब रहना पड़ता है,

और जिन के भरोसें इनकी गाडी चलती है,

छुपछुप के उनके करीब रहना पड़ता है

 

नयेनवेलों को परवाज़ की हिदायत नहीं होती,

आचरण में दाग ना हो तो कोई इनायत नहीं होती,

पर्दा है, परहेज़ है, सफ़ेद कुर्ता शराफत का दस्तावेज़ है,

काले को सफ़ेद बनाती है, राजनीती सब को कहाँ आती है

 

खाने के खिलाने के पुख्ता इंतज़ामात होते है,

शराफत सड़क पर नंगी सोती रौनक महलों में होती है,

यहाँ ना भाई भाई का हुआ बाप को बेटे से खतरा होता है,

राजनीती जिस्मफरोशी है कोई किसी के साथ भी सोता है

~ तबरेज़…

 

नज़र हम रख लेते है, नज़रिया तुम रख लो,
हमें बस बूँद से मतलब, ये दरिया तुम रख लो,
जो दरिया भी लगे थोड़ा, सारा जहाँ तुम्हारा…

हमें दिल का कोई कोना किनारा बहुत है,
वहाँ चुप चाप, ख़ामोशी से रह लूंगा,
तुम रख लेना ख़ुशी, मैं ग़म रखूँगा, किसी से कुछ ना कहूँगा…

अभी बह रहा हूँ, मुझे चुप-चाप बहने दो,
उतरना मत, रात भर, पहन कर सोया तुम्हें,
खिसको ज़रा मेरी ओर, सर्दी सी है, ज़रा आग जला दो…

और हाँ, एक उम्मीद है, अगर कर सको जो तुम पूरी,
अपना वादा निभाना…वो वादा याद हैं ना,
हमेशा प्यार करने का, तुम्हारा मुझसे ही…

जो नहीं मुमकिन, तो मुश्किल आसान कर देता हूँ,
मिटा कर मिट्टी में भर दो, तुम ज़िंदा रहो मैं मरूँगा,
फिर, दफ़ना या जला देना, लगे तुम्हें जो भी सही…

हाथ में आ जाऊँगा, हथेली में समा जाऊँगा,
बहा देना, मिटा देना, भूलना मत, मैं चैन से सो ना पाऊँगा,
ज़रा आओ क़रीब, पास खिसको , सवाल रहने दो…

समाँ जाओ, ना मैं रहूँ ना तुम रहो,
छुपा लो मुझ को ख़ुद में, फिर हम-तुम बहें,
देखो, सवाल बिखेरे पड़े हैं यहाँ वहाँ,
तुम्हारे बालों की तरह, हर जगह…

~ 3 Pounds…

Of-course you have to use one,

It isn’t safe my dear, otherwise,

I wouldn’t have bothered if you had none,

Since I know, you have to use one…

 

Hey, don’t be a lazy bum,

What’s the matter with you, catch a breath,

Count until ten, fine, only until three,

It isn’t going to cost you anything, it’s free…

 

Don’t rush, no, you won’t do without, use it,

It’s right up there, don’t mess with your hair,

Will you please stop, please, hold it right there,

Let me help you, come here, bare…

 

You know what’s the problem, we avoid an effort,

It may seem brave in haste, it’s nasty,

Why to later regret, make choices that are sane,

You have one, use it, I’m talking about your…brain…

~ शमशान…

 

मेरे घर के रास्ते में शमशान है, 

बेदर्द रोज़ लेता किसी की जान है,

आदमी को मिट्टी में मिला देता है,

सबको उनकी औक़ात दिखा देता है…

 

कभी भीड़ तमाम कभी दो चार आदमी,

बता देता है किसकी कितनी जान-पहचान है,

लौट जाते हैं फिर किसी रोज़ लौट आने को,

भूलना ही पड़ता है सच साँस चलाने को…

 

लटका चेहरा, दर्द गहरा, वक़्त ठहरा सा,

दो चार दिन, कुछ और ग़म, हर कोहरा छट जाता है,

आज किसी अपने को, कल किसी के अपने को,

छोड़ना वहाँ आता है, फिर काम में लग जाता है…

 

शमशान की इस बात पर मगर हँसी आती है,

उसके ठीक सामने एक हस्पताल भी हैं,

वहाँ से जान आती है यहाँ से चली जाती है,

ज़माने भर की फ़िक्र, बीच का का सफ़र, गोल सिफ़र…

 

शमशान के बग़ल में मुर्दाघर भी हैं,

दोनों की आपस में अच्छी बनती हैं,

जो एक में जलती है दूसरे में दफ़नायी जाती है,

राख मिट्टी की फिर मिट्टी में मिलायी जाती है…

 

हस्पताल और दोनों के बीच मैं एक सड़क है,

और एक चाय की दुकान, एक स्कूल, एक मयखाना हैं,

तीनों में एक चीज़ बड़ी अच्छी हैं,

देख लगता हैं वहाँ, दुनियाँ में सिर्फ़ ये तीनों सच्ची हैं…

 

सड़क के दूसरी ओर, इबादत और पूजा घर हैं,

आदमी अन्दर कुछ और बाहर कुछ और होता है,

लूटता है किसी को तो कभी खुद लूट जाता है,

फिर सड़क के उस पार जा चैन की साँस सोता है…

 

~ तज़रबा…

 

बात निकली है जो तज़रबे की,
मेरा भी है तज़रबा ज़िंदगी जीने का,
ख़ून रगों में कुछ ऐसे भी सुख जाता है,
जिनको तज़रबा है ख़ून का घूँट पीने का…

मैं कोई ज़रूरत तो नहीं जो पूरी हो जाऊँगा,
तज़रबा हूँ, और वक़्त के साथ ही आऊँगा,
जो दो पल में ज़िंदगी भर का तज़रबा माँगों,
रात ख़्वाब में आऊँगा, सुबह फुर्र हो जाऊँगा…

कभी बेअदबी, कभी बड़े अदब से आता हूँ,
तज़र्बा हूँ, और बड़ा ही तज़रबेदार तज़र्बा हूँ,
और इस बात का, मुझमें कोई गुमान नहीं है,
अपने सयानेपन का ढोल नहीं बजाता हूँ…

सुनता हूँ रोज़ न मालूम कितनो से, की,
सालों का तज़र्बा है, सालों का तज़र्बा हैं,
जाके कहदो कोई ऐसे सालों से, बवालों से,
मैं सालों का मोहताज नहीं, जो कल था वो आज नहीं हैं…

वो चूल्हा ना रहा जो कल रोटी पकाता था,
वो कल भी ना रहा, जब कोई घर मिलने आता था,
बूढ़े अब बाइक चला रहे हैं, और आपके “RIP” पर लाइक्स आ रहे हैं,
मश्वरा हैं, अपने तजर्बे का आप अचार डालें और खुद ही खालें…

…मेरे तजर्बे से बस इतना सा कहना है…

तज़र्बा हैं तो जी लें खुद, और औरों को भी जीने दें,
आप नहीं पीते तो जिसको पीनी है पिने दें,
किसे के आचरण का विवरण आपका काम नहीं हैं,
आदमी हैं आदमी ही रहें आप भगवान नहीं हैं…