Activity

  • सोच बंद, शब्द फरार, कलम सुखी, पन्ने खाली फड़फड़ा रहें हैं,

    तुम ज़रा दर्द दो ना…

    जिस्म ढीला, आँखें नम, ज़बान पे ताला, हर काम मैंने टाला,

    तुम ज़रा दर्द दो ना…

    होश हो के भी नहीं, ढूँढने […]

  • एक बार फिर नए साल की भविष्यवाणी ले कर हाज़िर, गाय का रखवाला, आपका अपना जानदार दारूवाला…

    पिछले साल की तरह ही 2 जीरो (नहीं ज़ीरो की रेटिंग नहीं) एक आठ, मेरा मतलब दो-हज़ार अठारह का उन्नीस होगा, स […]

  • ~ December-Twenty-Five…

    He swayed left from right and jumped up and down,

    He had a mask put on and wore a colourful gown,

    He made everyone laugh; it would be always a piece of fun,

    He was a short height m […]

  • तुम ईद का चाँद होती – तो क्या बात थी,जो ना कह पाया तुम वो बात होती – तो क्या बात थी,तुम आते जाते नज़र आती फिर ठहर जाती – तो क्या बात थी,तुम मेरी पहचान मेरी जात होती – तो क्या बात थी,तुम यहीं कहीं होती – तो क्या […]

  • Think out of the box!
    Cogito, ergo sum
    नाई और कसाई
    दो दुकाने आमने सामने,
    ~ और ~
    इतिहास में दर्ज एक शर्मनाक तारीख…

    राम राम भाई जान, आज बहुत लेट खोली दुकान…चाचा सलाम, हाँ आजकल सुबह सुबह कम होता है काम… […]

  • बहुत पानी बरसा उस रात,  हर आँख नम और सैकड़ों दिलो में था ग़म,
    फिर दो चार दोपहर बाद ढल गयी होंगी यादें, सैकड़ों के ज़हन से…
    बाक़ी जो बुझे थे दिये, आज भी इक आग बन दिलों में जल रहे है,
    सूरज ढल गए थे जिनके अ […]

  • अभी-अभी गयी दिवाली है…
    दिए जलें और लोग गले मिलें,
    घरो में खुशियों की मन्नते मांगी गयी,
    तर्रक्की और धन की वर्षा हो,
    ये सोच हुआ घमासान पूजा पाठ,
    उनके यहाँ जिनके है मस्त ठाठ…
     
    देख ये सब माता-लक्ष्मी हुई कुछ […]

  •  

     
    साये ये रात के साये,
    कहाँ ले आए हमें ये रात के साये,
    घनेरे कलेरे डरे डरे से ये घबराये,
    ओड़ चादर फटी ये ठुकराये,
    ये साये रात के…
     
    बिना बात कभी पीछे पड़े,
    धुआँ उड़ाते, चेहरा छुपाते, लड़खड़ाते,
    गि […]

  •  
    पड़ गया मेरे आराम में आज फिर खलल पड़ गया, फिर बैठे बैठे हुआ खड़ा आज फिर मन बदल गया,
    चलने ही वाला था पर जैसे ही उठाया पहला कदम, पिछले वाला अगले वाले से बेवजह ही लड़ गया…
     
    नीली पतलून, पिली क़मीज़ […]

  • ~ सुबह का अखबार…

    सुबह के अखबार को जैसे ही मुँह से लगाया,
    सर चकराया आँखों के आगे अँधेरा सा छाया…

    फ़ोन उठा नंबर मिलाया, हेलो हेलो चिल्लाया,
    डाक्टर साहब तबियत ज़रा नासाज़ सी है…

    डाक्टर फ़रमाया.. […]

  • ~ सहेली…
    ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~
    मोहे इश्क़ हुआ ज़रा धीरे से,
    धीरे धीरे से तेरे वीरे से,
    इक काम करा दे मेरा,
    ले चल कल उसे तू मेले में,
    मिलवा दे मुझे तू अकेले में,
    तू है ना मेरी पक्की वाली सहेली, सुलझा दे मेरे दिल की […]

  • ~ फंदा…
    आज मैंने ख़ुद से अपनी पहचान ले ली, मर गया हूँ मैं, मैंने अपनी जान ले ली,
    कैसे बताऊँ…क्यूँ किया, जो भी किया, कैसे बताऊँ…क्यूँ जिया, जैसे भी जिया…
     
    वजह तलाशता रहा ज़िंदगी भर जीने की, मिली एक ख़ूब […]

  • ~ One Horse Town…
    -:- -:- -:-    -:- -:- -:-    -:- -:- -:-
    ~ Can you see that horse?
    Yes
    ~ but why can’t I see it?
    What? It’s right there. In-fact, you only pointed me towards it. What kind of a joke is it? O […]

  •  

    मेरी तुम में तुम्हारी मुझ में, ये दिलचस्पियाँ,
    ना कम ना ज्यादा ना आधी ना अधूरी,
    सारी की सारी, मेरी तुम्हारी, पूरी की पूरी,
    ये हमारी…दिलचस्पियाँ…

    ना ढूंढे जगह ये ना कोई वजह ये,
    ना आ […]

  • ~ Ecliptic…
     

    Let’s meet in Autumn,
    When the leaves are leaving home…
    Or let’s meet soon after that;
    When the trees are naked…
    Or may be a further after;
    When they play a snowman wearing a white blanket…
    O […]

  • ~ आलोचना…
    जब करो तुम कोई वजह से किसी की भी आलोचना,
    रोक लेना जिह्वा को अपनी और दिल से इतना सोचना…
     
    की तुम में कितनी खूबियां है तुम में कितने दोष हैं,
    लेना पकड़ कोना कोई और आँखों को अपनी मूँद कर,
    अपनी सिमटी […]

  • And they started to walk together…
    they walked in a straight line which had highs and lows,
    as if the road was trying to match their heartbeat,
    an up and a down, an up and a down…
     
    In between they held th […]

  • ~ आयिना…

    ये काग़ज़ पलट के तुम क्या देखते हो,

    जला देखते हो या कुछ बचा देखते हो…

    तुम्हारी वो आदत अब भी बदली नहीं है,

    ख़ुद को तुम वैसा दूजे को बदला देखते हो…

    तुम्हें याद है बचपन […]

  • ~ कान्हा…

    मैय्या मोरी मैं नहीं माखन खायो…
    मैय्या मोरी मैं नहीं माखन खायो…
    सच बोलूँ  हूँ,
    सब सखा गवाल रै मिलके मोहे सताए,
    सब बोलें, तू गोपियाँ का प्यारा,
    वो तेरे कहें से आएँ, तेरे ही कहें से ज […]

  • ~ ऐब…

    चलो आपबीती सुनाता हूँ तुम्हारा दिल बहलाता हूँ,
    ऐसे वैसे जला हूँ मैं तो थोड़ा तुम्हें भी जलाता हूँ…

    मेरे सपनों में रोज़ाना एक कली खिला है करती,
    तुम ज़रा मुस्कुराओ तो मैं इक गुलाब खिलाता हूँ…

    निकल जा […]

  • Load More