Activity

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    साये ये रात के साये,
    कहाँ ले आए हमें ये रात के साये,
    घनेरे कलेरे डरे डरे से ये घबराये,
    ओड़ चादर फटी ये ठुकराये,
    ये साये रात के…
     
    बिना बात कभी पीछे पड़े,
    धुआँ उड़ाते, चेहरा छुपाते, लड़खड़ाते,
    गि […]

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    पड़ गया मेरे आराम में आज फिर खलल पड़ गया, फिर बैठे बैठे हुआ खड़ा आज फिर मन बदल गया,
    चलने ही वाला था पर जैसे ही उठाया पहला कदम, पिछले वाला अगले वाले से बेवजह ही लड़ गया…
     
    नीली पतलून, पिली क़मीज़ […]

  • ~ सुबह का अखबार…

    सुबह के अखबार को जैसे ही मुँह से लगाया,
    सर चकराया आँखों के आगे अँधेरा सा छाया…

    फ़ोन उठा नंबर मिलाया, हेलो हेलो चिल्लाया,
    डाक्टर साहब तबियत ज़रा नासाज़ सी है…

    डाक्टर फ़रमाया.. […]

  • ~ सहेली…
    ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~
    मोहे इश्क़ हुआ ज़रा धीरे से,
    धीरे धीरे से तेरे वीरे से,
    इक काम करा दे मेरा,
    ले चल कल उसे तू मेले में,
    मिलवा दे मुझे तू अकेले में,
    तू है ना मेरी पक्की वाली सहेली, सुलझा दे मेरे दिल की […]

  • ~ फंदा…
    आज मैंने ख़ुद से अपनी पहचान ले ली, मर गया हूँ मैं, मैंने अपनी जान ले ली,
    कैसे बताऊँ…क्यूँ किया, जो भी किया, कैसे बताऊँ…क्यूँ जिया, जैसे भी जिया…
     
    वजह तलाशता रहा ज़िंदगी भर जीने की, मिली एक ख़ूब […]

  • RVO wrote a new post, ~ One Horse Town… 4 weeks ago

    ~ One Horse Town…
    -:- -:- -:-    -:- -:- -:-    -:- -:- -:-
    ~ Can you see that horse?
    Yes
    ~ but why can’t I see it?
    What? It’s right there. In-fact, you only pointed me towards it. What kind of a joke is it? O […]

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    मेरी तुम में तुम्हारी मुझ में, ये दिलचस्पियाँ,
    ना कम ना ज्यादा ना आधी ना अधूरी,
    सारी की सारी, मेरी तुम्हारी, पूरी की पूरी,
    ये हमारी…दिलचस्पियाँ…

    ना ढूंढे जगह ये ना कोई वजह ये,
    ना आ […]

  • ~ Ecliptic…
     

    Let’s meet in Autumn,
    When the leaves are leaving home…
    Or let’s meet soon after that;
    When the trees are naked…
    Or may be a further after;
    When they play a snowman wearing a white blanket…
    O […]

  • ~ आलोचना…
    जब करो तुम कोई वजह से किसी की भी आलोचना,
    रोक लेना जिह्वा को अपनी और दिल से इतना सोचना…
     
    की तुम में कितनी खूबियां है तुम में कितने दोष हैं,
    लेना पकड़ कोना कोई और आँखों को अपनी मूँद कर,
    अपनी सिमटी […]

  • RVO wrote a new post, ~ Crescent… 2 months ago

    And they started to walk together…
    they walked in a straight line which had highs and lows,
    as if the road was trying to match their heartbeat,
    an up and a down, an up and a down…
     
    In between they held th […]

  • ~ आयिना…

    ये काग़ज़ पलट के तुम क्या देखते हो,

    जला देखते हो या कुछ बचा देखते हो…

    तुम्हारी वो आदत अब भी बदली नहीं है,

    ख़ुद को तुम वैसा दूजे को बदला देखते हो…

    तुम्हें याद है बचपन […]

  • ~ कान्हा…

    मैय्या मोरी मैं नहीं माखन खायो…
    मैय्या मोरी मैं नहीं माखन खायो…
    सच बोलूँ  हूँ,
    सब सखा गवाल रै मिलके मोहे सताए,
    सब बोलें, तू गोपियाँ का प्यारा,
    वो तेरे कहें से आएँ, तेरे ही कहें से ज […]

  • ~ ऐब…

    चलो आपबीती सुनाता हूँ तुम्हारा दिल बहलाता हूँ,
    ऐसे वैसे जला हूँ मैं तो थोड़ा तुम्हें भी जलाता हूँ…

    मेरे सपनों में रोज़ाना एक कली खिला है करती,
    तुम ज़रा मुस्कुराओ तो मैं इक गुलाब खिलाता हूँ…

    निकल जा […]

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    फलों के राजा आम ने कुछ खास करने का तय किया,
    छोड़ा पेड़ और किया प्रस्थान, कर दिया उसने ऐलान…
    अब आम, आम नहीं रहा वो एकदम खास हो गया,
    अब आम, आम नहीं रहा वो वो इलीट-क्लास हो गया…
    शहर के बीचों-बीच उसका अब […]

  • ये जो शहर कि सड़क है ना, ये हम तुम हैं,
    इस सड़क, यानी की हमारे चेहरे की झुर्रियाँ फ़ुटपाथ,
    और इस फ़ुटपाथ के होंठ भी है – डिवाईडर,
    अक्सर गुलाबी हो जाते हैं ये डिवाईडर,
    कभी एक, कभी दो पाँच साल में पक्का […]

  • सुनो आँच ज़रा धीमी कर दो, चावल देर से पकेंगे,
    और हम कुछ और देर तलक साथ लिपट लेंगे…
    कुछ कहना नहीं, आज तुमने फिर पाज़ेब को पहना नहीं,
    चावलों को धीरे-धीरे पकने दो, कुछ और देर सर रखने दो […]

  • ~ घुसपैठिया…

    मेरे दिल को वो अपना है घर कर बैठा,
    सामान मेरा सब इधर उधर कर बैठा,
    ना चाबी लगायी ना तोड़ा उसने ताला ,
    ना जाने कैसे है वो बसर कर बैठा…
    घुसपैठिया…

    ना उठाया मुझे ना मुझको जगाया मुझे,
    ना […]

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    दुश्मनों को भी दोस्त बना देती है,
    राजनीती है ये कुछ भी करा देती है,
    भाई को भाई से दरकार नहीं होती,
    ये आम आदमी की सरकार नहीं होती…
     
    यहाँ गरीब ही आना, गरीब रहना पड़ता है,
    बदनसीबों का बन के नसीब रहना पड़त […]

  • बेहोशी के आलम में आज सारी आवाम है, हुकूमत किसीकी भी हो, ये सत्ता की गुलाम है,
    ये अंधी, ये बेहरी है, और हाल जो हो, जैसा हो, आना इसी पर इल्जाम है, हुजूम इसका नाम है…
     
    आलम ये है अब के अव्वल तो सब डिजिट […]

  • ~ Knowledge Shoving…
    a ministry for power initiative
    16-07-3018

    Ministries to Organise Cultural Event
    The Ministry of Slavery & Bonded Labour has joined hands with Ministry of Racism to organise a cultural p […]

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