~ ऐब…

~ ऐब…

चलो आपबीती सुनाता हूँ तुम्हारा दिल बहलाता हूँ,
ऐसे वैसे जला हूँ मैं तो थोड़ा तुम्हें भी जलाता हूँ…

मेरे सपनों में रोज़ाना एक कली खिला है करती,
तुम ज़रा मुस्कुराओ तो मैं इक गुलाब खिलाता हूँ…

निकल जाना तो है आसान मैं थोड़ा और उलझाता हूँ,
तुम ठुकराओ चलो मुझको तुम्हें मैं फिर मुँह लगाता हूँ…

तुम्हारे बालों का ये गुच्छा तुम्हारे गालों की लाली,
कभी बालों को सहलाऊँ कभी गालों से गाल लगाता हूँ…

तुम कंधे पे रखना सिर मैं सिर से सिर मिलाता हूँ,
जो लगे जहान है सुना-सुना रुको मैं कुछ गुनगुनाता हूँ…
“के तू किसी रेल सी गुज़रती है…”

और उसपर…
आधी रात हो झमाझम बरसात हो पानी पानी चारों ओर,
तुम हिलना मत तुम्हें बाहों में ले के मैं तुम्हारे संग नहाता हूँ…

मुझे तुम याद रखना बस जैसे भी तुम्हें मैं याद आता हूँ,
शराफ़त छोड़ दो अब तुम मैं तुम्हारा ऐब बन जाता हूँ…

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