~ आँच…

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सुनो आँच ज़रा धीमी कर दो, चावल देर से पकेंगे,

और हम कुछ और देर तलक साथ लिपट लेंगे

कुछ कहना नहीं, आज तुमने फिर पाज़ेब को पहना नहीं,

चावलों को धीरेधीरे पकने दो, कुछ और देर सर रखने दो

थोड़ा सा होंठों में फाँसला करो, जो जगह मिलेगी,

आज कच्चे चावल खिला देना, मेरे होठों को चबा देना

बीचबीच में आँखें मुँदना, आज चावलों का पानी पिला देना,

तुम कूदना और मुझे फाँदने की वजह देना

आज ख़्वाब सज़ा लेते है, रहने दो चावल, रात भर पका लेते है,

पकने दो उन्हें भी, जगने दो हमें भीसहर तक, दोपहर तक

 

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