~ हुजूम…

बेहोशी के आलम में आज सारी आवाम हैहुकूमत किसीकी भी हो, ये सत्ता की गुलाम है,

ये अंधी, ये बेहरी है, और हाल जो हो, जैसा होआना इसी पर इल्जाम है, हुजूम इसका नाम है

 

आलम ये है अब के अव्वल तो सब डिजिटल है, और बैठ बंद कमरों डीजीटाइज़ेशन भी कमाल का,

वो कमरे अफवाहों के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बने बैठे हैंअफवाहे बनायीं, उड़ाई और आखिर में ख़बरे बन आती हैं

 

मुद्दों से मुख्तलिफ है मगर हुजूम में अक्ल की कमी नहींहुजूम बेरोज़गार है, कहीं भूखा कहीं बेघर है ये हुजूम,

कहीं अनपढ़, सरकार का खरीदा कारीगर कहीं हुजूमइस कमअक्ल हुजूम को सरकारी कारें चलाती हैं

 

इसलिए शायद ये वो भीड़ है जो मौकापरस्त हैमारकाट, पथराव तो कभी बलात्कार में मस्त है

हुजूम का ना कोई वजूद है ना है इसका कोई जूनूनउसके नाम पर कुछ भी लूट लो, क्या कर लेगा कानून

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