~ गुज़र जाऊँ…

~ गुज़र जाऊँ…

यहाँ से गुज़र जाऊँ या वहाँ से गुज़र जाऊँ,

इस सोच में हूँ ठहर जाऊँ या इस जहाँ से गुज़र जाऊँ,

ना क़ाबा ही मुत्तासिर है ना मंदिर का नज़ारा,

करूँ कहाँ सजदा या कहीं भी फिसल जाऊँ,

मसलों के मसालों में पिस रही है नस्लें,

इजहार करूँ या उन्हें पहचान्ने से मुकर जाऊँ,

इमली यहाँ की मीठी है और बातें सब खारी,

नक़ल बड़ी असली है, दो ज़हर ज़रा सा, निगल जाऊँ,

लोहे के दरवाज़ों को भी दीमक है खा रही,

सोच रहा हूँ बन के मौसम मैं भी बदल जाऊँ

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